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Showing posts from March, 2019

कबीर पंथ

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 कबीर परमेश्वर ने धर्मदास जी को कहा कि मेरे नाम से कलयुग में काल 12 पंथ चलाएगा 12 पंथ वाले सब मेरी महिमा गाएंगे परंतु सतलोक नहीं जा पाएंगे क्योंकि उनके पास में सत मंत्र नहीं होंगे सत मंत्र देने के लिए कलयुग 5505 बीतेगा तब मैं आऊंगा धर्मदास इन सब पंथो को मेट कर एक पंथ चलाऊंगा जो मेरा नाम लेगा उसका जन्म मरण छुडाऊगा यह सब बातें कबीर सागर में लिखी हुई है धर्मदास जी के द्वारा और कबीर साहब ने बोली थी अब वह समय आ चुका है और संत रामपाल जी महाराज के रूप में स्वयं परमात्मा कबीर साहेब आए हुए अपने आप को छुपाए हुए यही सच्चे मालिक है

कबीर परमेश्वर

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  सनातन राम कबिर है यह हमारे वेदों में लिखा हुआ है हमारे वेद पृथ्वी के सबसे पुराने ग्रंथ है जिनको सारी दुनिया मानती है और वेदों में पूर्ण परमात्मा कबीर  लिखा हुआ है  कबीर भगवान सतलोक में अपने राज महल में राजा के समान बैठा हुआ है और वहां से चलकर पृथ्वी लोक  में आता है अपने भक्तों से मिलता है और उन्हें सुख देता है यह सब जानकारी लिखी हुई है हमारे यहां के जितने भी देव फरिश्ते भगवान हैं सब नाशवान है परंतु वेद कहते हैं कबीर भगवान सबका मालिक एक है वही सनातन है कबीर परमेश्वर कहते हैं जो तोको कांटा बोए तांको बो तूँ फूल तो है फूल को फूल है बा को है तिरसूल  कबीर परमेश्वर कहा करते थे कि कोई हमारे साथ बुरा करें हमें उसका बुरा नहीं करना हमें उसका भला करना है   कबीर परमेश्वर ने 33 अरब वाणी बोली जिनको आज भी लोग गीतों में भजनों में और सत्संग में यूज करते हैं कबीर परमेश्वर की  एक एक शब्द मैं गहरा अर्थ निकलता है दिल को छू जाता है हर वाणी में सत्यता मिलती है

संत कबीर

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संत कबीर कबीर साहेब काशी नगर में सशरीर आए थे और सशरीर वापिस चले गए यानी उनका जन्म और मृत्यु नहीं हुआ और वेदों में लिखा है पूर्ण परमात्मा जो सतलोक का मालिक है वह पृथ्वी पर सशरीर आता है और और सशरीर जाता है यह सब लीला कबीर परमेश्वर ने कर रखी है परंतु हमारे धर्म गुरु अज्ञान वस यह सब समझ नहीं पाए उन्होंने तो सिर्फ कर्मकांड को ही ज्यादा महत्व दिया जिससे उनका भरण पोषण का गुजारा चलता रहा और हमारे पूर्वज सब अनपढ़ थे इसलिए जैसा आदेश मिलता वही पूजा करते रहते परंतु परमात्मा कीी दया से आज हम सब पढ़े हुए हैं और यह समझ सकते हैं कि कौन से ग्रंथ में  कौन सी भक्ति लिखी हुई है क्या शास्त्रर अनुकूल है या  शास्त्र विरुद्ध है कबीर साहिब ने मूर्ति पूजा का खंडन किया था मंदिर मस्जिद  का बहिष्काार किया था और वे एक सत भक्ति करते और कराते थे जिसमें कहीं जानेे कि जरूरत नहीं पड़ती काम करते-करते ही भक्ति करते रहो घर पर रहकर परमेश्वर की भक्ति माला जाप करते रहो