संत कबीर

संत कबीर
कबीर साहेब काशी नगर में सशरीर आए थे और सशरीर वापिस चले गए यानी उनका जन्म और मृत्यु नहीं हुआ और वेदों में लिखा है पूर्ण परमात्मा जो सतलोक का मालिक है वह पृथ्वी पर सशरीर आता है और और सशरीर जाता है यह सब लीला कबीर परमेश्वर ने कर रखी है परंतु हमारे धर्म गुरु अज्ञान वस यह सब समझ नहीं पाए उन्होंने तो सिर्फ कर्मकांड को ही ज्यादा महत्व दिया जिससे उनका भरण पोषण का गुजारा चलता रहा और हमारे पूर्वज सब अनपढ़ थे इसलिए जैसा आदेश मिलता वही पूजा करते रहते परंतु परमात्मा कीी दया से आज हम सब पढ़े हुए हैं और यह समझ सकते हैं कि कौन से ग्रंथ में  कौन सी भक्ति लिखी हुई है क्या शास्त्रर अनुकूल है या  शास्त्र विरुद्ध है कबीर साहिब ने मूर्ति पूजा का खंडन किया था मंदिर मस्जिद  का बहिष्काार किया था और वे एक सत भक्ति करते और कराते थे जिसमें कहीं जानेे कि जरूरत नहीं पड़ती काम करते-करते ही भक्ति करते रहो घर पर रहकर परमेश्वर की भक्ति माला जाप करते रहो

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